Incest खाला जमीला – Part 2 – kambikuttan

मैंने खुश होते हुये हामी भर ली। ज़ारा से पहले उसकी अम्मी की फुद्दी मिल रही हैं मुझे। 3:00 बजे वापस घर
आ गयें हम। आँटी अपने घर चली गई थी और मैं अपने घर आ गया।

घर में खामोशी थी। मैं भी चुप करके नानी के कमरे में चला गया वहां नानी और खाला सो रही थी। मामी पेंट के बल लेटी हुई थी। जिस वजह से उनकी गाण्ड उठी हुई थी। साने के दौरान उनकी कमीज भी चूतड़ों से ऊपर को उठी हुई थी, जहां से उनकी कमर का थोड़ा सा नंगा हिस्सा नजर आ रहा था।

औटी को इतने सेक्सी अंदाज में सोता देखकर मुझे होशियारी आई। मैं आराम से आगे बढ़ा और आँटी पे चढ़कर उनपे उल्टा लेट गया, जिससे मेरा लण्ड उनकी जांघों के बीच चला गया। लेटते हये मैंने ये हिसाब रखा था की लण्ड सीधा वहीं जाए। जैसे ही खाला को वजन महसूस हुआ तो वो उठ गईं।

मैंने फुसफुसाया- “खाला लेटी रहे प्लीज… में ऐसे ही लेटना चाहता हैं आपके ऊपर…”

खाला चुप कर गई। चूतड़ों के बीच उनकी सलवार का कपड़ा और मेरी सलवार का कपड़ा था बस। लण्ड अब खड़ा होकर उनके चूतड़ों पे ठोकरें मार रहा था। खाला के भारी और मोटे चूतड़ मेरे नीचे दबे हमें थे। मैंने खाला को कंधे पे किस की पीछे से उनकी गर्दन पर भी की। इस दौरान खाला में चहरा बगल में किया तो उनकी गाल पे किस की।

मेरा लण्ड पूरा टाइट हो चुका था, जो खाला के नरम चूतड़ों में फंसा हुआ था। जिसका खाला को भी साफ पता चल रहा था, लेकिन मुझे कुछ कह नहीं रही थी। मैं अपने हाथ खाला के कंधों पे रखें हमें था और जब लण्ड उनके चूतड़ों पे दबाता था तो उनके कंधे जोर से पकड़ लेता था। मेरा दिल कर रहा था की अभी खाला की सलवार खींचकर नीचे कर द। और अपना नंगा लण्ड उनके नंगे चूतड़ों में डाल दूं।

मने खाला का गरम करने के लिये कहा- “खाला जान बहुत मजा आ रहा है आपसे चिपक के। पीछे से तो आप मलाई लगती हो…”

खाला मुश्कुराई और कहा- “चप कर बेशर्म…” और साथ है अपनी मोटी गाण्ड मेरे लण्ड पे दबा ली।

खाला में टांगें थोड़ी खोली तो मेरा लण्ड अंदर चला गया उनकी जांघों में। खाला में टांगें बंद कर ली। अब मेरा लण्ड अच्छी तरह खाला के चूतड़ और फुद्दी से रगड़ खा रहा था। सिर्फ दो मिनट मैंने घस्में मारे और खाला चूतड़ों को नरम और टाइट करती रही, जिससे मैं मजे की इतेहा पें पहुंच गया। ऐसे लग रहा था की मैं उनके नंगे चूतड़ों में अपना लण्ड रगड़ रहा हैं। खाला का ये सेक्सी हमला में संभाल नहीं सका और जल्द ही फारिग हो गया। ये खाला ने पता नहीं कहां से हुनर सीखा था जो लण्ड को एक मिनट में फारिग कर देती थी। मुझे इसका कोई हल सोचना पड़ेगा।

मैं वहां से उठा और अपनी चारपाई पे लेट गया।

खाला ने मेरी तरफ देखा और कहा- “इतनी जल्दी उठ गया मेरा बेटा?”

मैंने कहा- “खाला आप पता नहीं क्या करती हो मुझसे संभाला नहीं जाता…”

खाला ने कहा- “चिपकने का तो बहुत शौक है तुमका?”

में शमिंदा हो गया। जब खाला की तरफ देखा तो उनके चेहरे पे शरारती मुश्कान थी। मुझे भी शरारत सझी मैंने कहा- “खाला अब कपड़ों के ऊपर से मजा नहीं आता..”

खाला ने कहा “चल चुप कर… जितना तुम चिपकते हो यही बहुत है। बड़े आए मजा लेने वाले। अभी तुम छोटे हो, बड़े तो हो जाओ…” ऐसी बातों में ही टाइम गुजर गया।

शाम को सहन में बैठे थे सभी, और मैं मामी से आँख मटक्का कर रहा था। आज फुद्दी लेने को दिल कर रहा था और इस वक़्त सबसे आसान मुझे मामी की फुद्दी ही मिलती नजर आ रही थी। मैं आते जाते गुजरते मामी के चूतड़ दबा देता, जिसको मामी भी खूब एंजाय कर रही थी। मैं रात का खाना खाकर कुछ देर इंतजार किया। जब देखा 8:00 बज गये हैं, तो में घर से निकाला और आँटी राबिया के घर पहुँच गया।दरवाजा खुला था। मैं अंदर चला गया। दरवाजे को कुण्डी लगा दी थी मैंने। आँटी मेरा ही इंतजार कर रही थी।

ऑटी मुझे एक कमरे में ले गई। जैसे ही रूम में पहुँचे औटी ने मुझे झप्पी डाल ली और कहा- “सुबह से फुद्दी पानी छोड़ रही है…

आँटी को झप्पी लगाकर मुझे ऐसे लग रहा था जैसे गरम रुई को मैंने पकड़ा हो। आँटी राबिया नरम और लचकदार जिश्म की मालिकिन थी। इंतहाई सेक्सी जिश्म था, जो शेप में बना हुआ था। गोल-गोल मम्मे जो आगे को निकले हये थे। मैंने उन मम्मों में हाथ रख दिया, तो आँटी की सिसकी निकाल गई। मम्में इतने नरम थे की दिल कर रहा था इनको दबाते जाऊँ। कुछ देर बाद ऑटो ने मेरा लण्ड पकड़ लिया और दबाने लगी।

मैं औंटी के होंठ चूसने लगा। पतले होंठ चूसने में बहुत मजा आ रहा था। कुछ देर बाद मैंने और औंटी ने पूरे कपड़े उतार दिये। इस बात मेरा लण्ड बिल्कुल सीधा खड़ा था और आँटी का जिश्म एक शेप पे था। सीना और चूतड़ों पे ज्यादा गोस्त चढ़ा हुआ था आँटी के।

आँटी ने मुझे बेड पे लेटने को कहा और खुद भी लेट गई। मैंने आँटी को झप्पी लगाई और उनके चूतड़ पकड़ लिए और उनको दबाने लगा। लण्ड पे मुझे उनकी गीली चूत लग रही थी जो इस वक़्त मेरे लण्ड की गरम टोपी
से टकरा रही थी। मेरे जिस्म में मजे की लहर दौड़ रही थी। आँटी मेरे लण्ड को पकड़कर टोपी पे अपने अंगूठे को गोल-गोल घुमाने लगी। मैं इस कदर सेक्सी मजा था की मैंने जोश में आँटी की गाण्ड में उंगली घुसा दी।

में मन में- “ये क्या बहनचाद? आँटी की गाण्ड खुली हुई थी…”

आँटी ने मेरी हैरानगी देख ली, और मुझसे कहा- “ये ज़ारा के अब्बू का कमाल है। वो शुरू से मेरी गाण्ड का दीवाना था..

आँटी की गाण्ड अंदर से मुलायम थी। मेरी उंगली फिसलती हुई अंदर-बाहर हो रही थी। औंटी मेरे लण्ड को कभी मसलती और कभी जोर-जोर से दबाने लगती। मैंने गाण्ड से हाथ उठाया और आँटी के नरम मम्में पकड़ लिए। उनके निपल छोटे लेकिन अकड़े हुये थे। मैंने निपल मुँह में लिए और चूसने लगा, साथ मम्मे दबा भी रहा था।

आँटी ने लण्ड छोड़कर लण्ड को अपनी जांघों में सेंट किया और फुट्टी को लण्ड पे रगड़ने लगी। रोशनी में औंटी का लचकदार और चमकता जिस्म मुझपे कहर ढा रहा था। पिंक निपल और फुद्दी भी पिक थी जो अब गरम होकर लाल पिक हो रही थी। मैं और आँटी इस वक़्त पूरा संक्मी नशे में थे।

आँटी ने मुझसे कहा- “उठो और अब मेरी फुद्दी मारो। कब से पानी बहा रही है…”

मैं उठा और आँटी की टांगों में आ गया। आँटी की चिकनी टाँगें पकड़कर मैंने ऊँची की और बगल को फैला दिया। जिससे फुद्दी खुलकर मेरे सामने आ गई। फुदद्दी के पानी से चमकती हुई फुद्दी को मैं आँखें फाड़-फाड़कर देख रहा था। इतनी हसीन फुद्दी ना तो मामी की थी ना लुबना। ना बाजी अमीना की।

मैंने अपने झटके खाते लण्ड को पकड़ा और फुद्दी की लकीर में फंसाकर ऊपर नीचे लण्ड रगड़ने लगा। मजे से मेरी आँखें बंद हो गई। आँटी की सिसकियां निकलने लगी को लगातार निकल रही थी। मजे से मेरा जिश्म कांपने लगा था। मैं मजे से पागल हो रहा था की औंटी ने अपना हाथ आगे किया और मेरा लण्ड पकड़ लिया, जो इस वक़्त आँटी की फुद्दी के पानी से लिथड़ा हुवा था, और लण्ड को फुद्दी के छेद पे सेंट किया।

मैंने जोरदार झटका मारा, जिसमें लण्ड जड़ तक औंटी राबिया की चिकनी फुद्दी पे घुस गया। आँटी की हल्की चीख निकाल गई। मैं आँटी के ऊपर लेट गया और उनकी गर्दन पे किस करने लगा, और जुबान में उनकी गर्दन
और सीने को चाटने लगा। कुछ ही देर बाद थूक से आँटी की गर्दन और सीना चमकने लगा।

आँटी अपने दोनों हाथ मेरी गाण्ड पे रखे और फुद्दी की तरफ लण्ड दबाने लगी। ये दृश्य देखकर मुझे जोश आया और मैं जोर-जोर से लण्ड को फुद्दी में अंदर-बाहर करने लगा। मेरी जांघ ठप.ठप आँटी के चूतड़ों पे नीचे टकरा रही थी। जिससे आँटी के जांघ थिरक रही थी। इतना लचकदार गोस्त था की ऐसे लग रहा था जैसे पानी
की लहरें उठ रही हों।

मैं उठा आँटी की जांघों को पकड़ा और लण्ड के धक्के मारने लगा, और नजर नीचे करके लण्ड को चिकनी फुदी में आते-जाते देख रहा था। वो दृश्य इतना सेक्सी था की मुझे अपने लण्ड में लहरें उठती महसूस हुई। आँटी का जिश्म अकड़ा और फुद्दी से गरम पानी लण्ड पे बहता हुआ बाहर बैंड शीट पे गिरने लगा। मुझे भी अपना लण्ड
खाली होता महसूस हुवा। मैं आँटी पे लेट गया। जिश्म पीने से सराबोर था।

kambikuttan

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