Incest खाला जमीला – Part 2 – kambikuttan

उसके घर पहुँचे तो उसकी अम्मी ने मुझे पानी पिलाया। ज़ारा की अम्मी का नाम राबिया था। वो एक 40-42 साल की औरत थी। बहुत ही दिलकश खातून थी, इंसिंग वा माइन करती थी। जिश्म इंतहाई लचकदार था। स्मार्ट होने के बावजूद उनका जिश्म थिरकता था।

कुछ देर बाद औटी राबिया बड़ी सी चादर में बाहर आई रूम से, और मुझसे कहा- “बेटा मेरे साथ चलना साथ के
गाँव में। वहां एक घर में फोल्गी हुई है ता अफसोस करने जाना है। आँटी ने नीचें टाइट पाजामा और शार्ट कमीज पहनी हुई थी। मैं और औंटी घर से निकले और पैदल ही चल पड़े। दूसरा गाँव 30-40 मिनट दूर था। हम खेतों में चलते जा रहे थे। ऑटी आगे मैं पीछे था। चादर के बावजूद ऑटी की गाण्ड थिरक रही थी। नीचे टॉग मुझे नजर आ रही थीं। नीचे से पतली और ऊपर जाते-जाते मोटी थी टाँग।

औटी ने पूछा- “थक तो नहीं जाओगे?”

मैंने कहा- “नहीं ऑटी, इतना तो में चल ही लेता है.”

आँटी ने कहा- “मुझे टहलने का शौक है, इसलिए में पैदल आ गई। वरना गाड़ी पे भी आ सकते थे..”

मैंने कहा- “मुझे भी शौक है आँटी टहलने का..”

आँटी ने कहा- “ओह्ह… अच्छा मैं सुबह-सुबह तहलने निकलती हूँ तब थोड़ा अंधेरा होता है। जब दिन निकलने लगता है मैं घर आ जाती हैं.”

मैंने कहा- “मैं रात को निकलता हूँ टहलने…”

आँटी ने कहा- “तुम सुबह-सुबह आ जाया करो। मेरे साथ भी कर लिया करो वाक…”

मैं बड़ा खुश हुआ की एक सेक्सी आँटी मुझे में आफर कर रही है। ऐसे ही गप-शप करते दूसरे गाँव पहुँचे। औंटी और मैं एक घर में दाखिल हये। जहां काफी भीड़ था। मैं उनकी बैठक में बैठ गया। आँटी अंदर चली गई। बैठक भी भरी हुई थी मदों से। खाना भी वहीं बैठकर खाया मैंने। ऐसे ही बैठे-बैठे शाम हो गई।

आँटी मेरे पास आई और कहा- “चला आओ बेटा अब चलते हैं। काफी टाइम हो गया है…”

में और राबिया औंटी वहां से निकले और चल पड़े। अंधेरा छा रहा था। खेत सुनसान पड़े हये थे। कुछ ही सफर किया होगा की हमको गीदड़र के चिल्लाने की आवाज आई। हम दोनों डर गये। मैं और आँटी वहीं रुक गर्म और देखने लगे किधर से आवाज आई। अभी हम देख ही रहे थे, की एक तरफ से हमको चलता हुआ गीदड़ नजर
आया। मैं और आँटी छुपने की जगह देखने लगे।

एक तरफ हमको पानी की हौदी नजर आई जो सूखी हुई थी हम उस तरफ चल पड़े। हौदी छोटी सी थी। मैं और औंटी उसमें उत्तर गये। ऑटी मेरे आगे और मैं पीछे था। हम दोनों आगे-पीछे होकर बैठे थे। आँटी ने सिर बाहर निकाला और गीदड़ को देखने लगी जो खेत में चक्कर काट रहा था। मैं भी सिर उठाकर बाहर देखने लगा। अंजाने में अपने हाथ राबिया के कंधे पर रख दिए।

औंटी उधर देखने में मगन थी। अचानक वहां एक और गीदड़ आ निकला। वो दोनों इकट्ठे हुये और मुँह लगाने लगे एक दूसरे को। आँटी बड़े गौर से देखने लगी उनका। मेरा ध्यान भी उधर ही था। आँटी में अपना एक हाथ मेरे हाथ पे रख दिया ताकी मैं घकाऊँ नहीं।

देखते ही देखते एक गीदड़ पीछे हुआ और दूसरे के ऊपर चढ़ गया। दोनों सेक्स करने लगे। इनमें शायद एक
गीदड़ी थी। औंटी चौक पड़ी। औंटी ने मेरी तरफ देखा। हम दोनों शमिंदगी से हँस पड़े। दुबारा हम उनको देखने लगे। मेरा इर अब खतम हो रहा था और गीदड़ों को देखकर मेरे लण्ड में जान पड़ती जा रही थी। औंटी की गाण्ड बाहर निकली हुई थी, जो मेरे लण्ड से चंद इंच ही दूर थी।

मैं धीरे से थोड़ा आगे हुवा और लण्ड उनकी गाण्ड से चिपका दिया, और शो ऐसे किया जैसे मुझे पता ना हो। जब लण्ड उनके चूतड़ों पे लगा तो औंटी ने घूमकर मेरी तरफ देखा और फिर आगे देखने लगी। जब मैंने देखा
औटी ने कुछ नहीं कहा तो मैं आगे कुछ करने की सोचने लगा।

तभी अचानक मुझे अपने लण्ड में दबाओ महसूा हुवा, तो क्या देखता हूँ की आँटी अपनी गाण्ड मेरे लण्ड पे रगड़ रही हैं। शायद ऑटी गरम हो गई थी बाहर का दृश्य देखकर। औंटी ने मुझसे कहा- “बेटा जब ये जायेंगे तो हम भी उठकर निकल जायेंगे बस थोड़ी देर और रुक जाओ…”

तभी अचानक मुझे अपने लण्ड में दबाओ महसूा हुवा, तो क्या देखता हूँ की आँटी अपनी गाण्ड मेरे लण्ड पे रगड़ रही हैं। शायद ऑटी गरम हो गई थी बाहर का दृश्य देखकर। औंटी ने मुझसे कहा- “बेटा जब ये जायेंगे तो हम भी उठकर निकल जायेंगे बस थोड़ी देर और रुक जाओ…”

अब धीरे-धीरे अंधेरा छाने लगा था। मैं भी अब बेखौफ लण्ड उनके चूतड़ों में रगड़ रहा था। औंटी भी बड़े मजे से लण्ड रगड़वा रही थी।

मैं आँटी पे झुक गया था। अपना ऊपरी जिश्म उनकी गाण्ड से टिका दिया और नीचे घस्से मारने लगा। मेरा अकड़ा हुआ लण्ड उनके चूतड़ों में लग रहा था। गीदड़ अब चले गये थे। लेकिन हम वैसे ही लगे हये थे अपनी मस्ती में। मैंने अपने हात आँटी के मम्मों में रख दिए और उनको दबाने लगा। बहुत ही नरम मम्मे थे उनके। मैं मजे से उनको दबा रहा था।

आँटी ने कहा- “चलो बेटा अब चलते हैं…”

मैंने कहा- “औंटी रूक जाएं, थोड़ी देर बाद चलते हैं…

आँटी ने कहा- “बेटा लेट हो गये हैं पहले ही। तुम सुबह आना वाक पे फिर हम मिलेंगे। तुम गली की नुक्कड़ में आ जा सुबह… हम उठे घर की तरफ चल पड़े। गाँव पहुँच कर आँटी को उनके घर छोड़ा और बाहर से ही अपने घर की तरफ आ गया।

घर में सब परेशान थे लेकिन जब वजह बताई तो वो सब हँसने लगे। खैर, इस दौरान खाना खाया गया। मैं थका हुआ था। बाहर जाने को भी दिल नहीं कर रहा था। हालांकी जारा ने टाइम दिया हुआ था। मैं लेट गया और जल्दी सो गया।

सुबह मैं जल्दी उठा, तो अभी कुछ अंधेरा था हल्का। मैं बाहर निकल गया। आँटी की गली में पहुँचा तो आँटी अपने घर से निकाल रही थी। मैं उनके साथ हो लिया। हम बातें करते-करतें खेतों में निकल गयें। सुबह का मौसम एंजाय करने लगा

औटी ने कहा- “हाँ अब बोलो, कल क्यों रुकने का कह रहे थे वहां?”

मैं घबरा गया क्योंकी मुझे उम्मीद नहीं थी औंटी सीधा ही पूछ लेंगी। मैंने हकलाते हुये कहा- “वैसे ही आँटी, बस दिल कर रहा था…”

औटी मुश्कुराई और कहा- “अभी तुम छोटे हो बेटा। अछा नहीं लगता तुम्हारे साथ कुछ कर…’

मैं चुप रहा।

औटी ने कहा- “कुछ बड़े होते तो सोचा जा सकता था..”

मैं बड़ा परेशान हुआ आँटी की बातें सुनकर। मुझे पता नहीं अचानक कु किया सझी मैंने कहा- “आँटी मेरा 5” इंच का लण्ड है….

औटी हक्का-बक्का होकर मुझे देखने लगी। मैं भी डर गया कीये मैंने क्या कह दिया है। आँटी होश में आई और कहा- “चल झूठा… ऐसे कैसे हो सकता है?”

मैंने कहा- “आप देख सकती हो… फिर पता चल जाएगा.”

आँटी ने कहा- “यहां कहां देख लू?”

मैं आँटी को उसी झोपड़ी में ले गया, जहां बाजी अमीना को पहली बार चोदा था। वहां आकर मैंने आँटी को कहा तो उन्होंने मेरे लण्ड पे हाथ लगाया जो अभी सोया हुआ था।

आँटी ने कहा- “ये तो अभी सो रहा है..” और हँसी।

मैंने कहा- “इसको हिलायें तो खड़ा हो जाएगा…”

kambikuttan – Bhabhi sex story – ननंद,भाभी और नौकर

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