कुछ देर बाद मैंने हिम्मत करके खाला से धीमी आवाज में कहा- “खाला आपकी चारपाई पे आ जाऊँ?”
खाला ने भी फुसफुसा कर कहा- “आ जाओ बेटा..”
इस तरह ऐसे लग रहा था जैसे सेक्सी आवाजों में हम बातें कर रहे हो। मैं उठा और आराम से उनकी चारपाई पे चला गया। मैंने कमीज पहले ही उतरी हुई थी। खाला भी दुपट्टा उतार के लेटी हुई थी।
खाला अब सीधी होकर लेट गई थी, और मेरा हाथ उनके पेट पर था। मैं हाथ को धीरे-धीरे खाला के नरम पेट पे घुमा रहा था और मजा ले रहा था। मैंने खाला की तरफ करवट ली हुई थी।
मैंने कहा- “खाला, आज तो बड़ा ठंडा मौसम है। आज यहीं मुरी बना हुवा है…
खाला ने कहा “मुरी भी जायेंगे कभी। फिर वहां खूब एंजाप करेंगे…”
में अब खाला के और करीब हो गया था।
खाला में अपना दायां बाजू आगें किया और कहा- “इस पें अपना सिर रख लो..”
मैंने सिर उठाया और उनके बाज़ में रख लिया। इस तरह मैं अब खाला के साथ चिपक गया था और मेरा चेहरा खाला के मम्मे को बगल से छूने लगा। मुझे खाला के जिश्म को भीनइ-भीनइ खुशबू चढ़ने लगी।
खाला ने मुझे अपने साथ दबा लिया और कहा- “मो जाओं बेटा। अब काफी टाइम हो गया है..”
मैंने कहा- “खाला, नींद नहीं आ रही अभी..” फिर मैंने खाला को गाल पे किस की और कहा- “आप भी ना सोना अभी खाला प्लीज…”
में किस की और कहा- “आप भी,
खाला ने मुझे चपत लगाई और कहा- “तुमको बड़ा शौक है मुझे जगाने का?”
हम धीमी आवाज़ में बातें कर रहे थे और चेहरे पास-पास थे हमारे। माहौल काफी रोमैटिक बन गया था। खाला ने अचानक मेरी तरफ करवट ली और पूरा मेरे से जुड़ गई। अब हमारे चेहरे बिल्कुल पास-पास थे।
मैंने खाला के होठों पे किस की और अपनी आवाज को सेक्सी बनाकर कहा- “खाला आपके होंठ बड़े मुलायम हैं। दिल कर रहा है खा जाऊँ इनको…”
खाला ने भी इसी लय में कहा- “खा जाओ बेटा। तुम्हारी खाना तुमसे बहुत प्यार करती है…”
जब खाला ने ऐसा कहा तो मैंने अपनी एक टांग खाला के ऊपर रख दी और हाथ खाला की गर्दन में ले गया। वहां नंगे सीने और गर्दन में हाथ फेरने लगा, और अपने होंठ खाला के होंठों के ऊपर रखें और उनको धीरे-धीरे किस कर रहा था और होठ रगड़ रहा था। लण्ड मेरा कच का खड़ा हुवा खाला की जांघों से छू रहा था। खाला भी अब अपने होंठ मेरे होंठों से रगड़ रही थी अभी।
मैंने कहा- “खाला मजा आ रहा ऐसा कर?”
खाला में बस हम्म्म्म की आवाज निकली मुँह से।
इस वक़्त मुझ पे पूरा सेक्स सवार हो गया था और दिमाग पे हवस चढ़ गई थी। खाला भी अब गरम हो रही
थी। अभी तक हम में खुलकर कुछ नहीं हुआ था। सीने में हाथ फेरत-फेरते मैंने हाथ खाला के मम्मे में रख दिया। अब मैं खाला का हॉठ पकड़ा और चूसने लगा। खाला की गरम साँसें मेरे चेहरे पे पड़ रही थी।मैंने कुछ देर होंठ चूसकर खाला से कहा- “खाला मुझे आपका दूध पीना है…’
खाला ने अपनी कमीज पकड़ी और ऊपर कर दी अपने गले तक। मैंने हाथ आगे किया और ब्रा पकड़कर ऊपर कर दिया। खाला का बायां मम्मा बाहर निकल आया। जैसे ही मम्मा बाहर निकला, मैंने पकड़ लिया और अपना मुँह उनके मोटें निपल से लगा दिया। उफफ्फ… क्या मम्मा था खाला का। भारी मम्मा इस बात मेरे हाथ में था। खाला की सिसकियां निकल गई थी। खाला अपनी सिसकियां दबा रही थी।
में मम्मे को जोर-जोर से दबा रहा था, और निपल पे कभी जुबान की नोक पंचता या चूसने लग जाता। जब जुबान की नोक निपल पे फेवता तो खाला का जिस्म कांप जाता। मैं इस बक्त्त पूरा मजे में था और लण्ड मेरा फटा जा रहा था, इस कदर हाई हो गया था।
मम्मे चूसने का मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। खाला भी मजे में थी और मेरे सिर को अपने मम्मे पे दबा रही थी। जिस बजह से मेरा मुँह उनके मोटे मम्मे पे दब गया था। मैंने खाला की एक टांग पकड़ी और अपने ऊपर कर दी, और अपना लण्ड पकड़कर खाला की फुद्दी से लगा दिया। जैसे ही लण्ड फुट्दी पे लगा, तो मुझे ऐसे लगा जैसे खाला में अपनी फुददी मेरे लण्ड में दबा दी हो।
इधर मैंने खाला का पूरा मम्मा गीला कर दिया था चूसकर। मम्मे से मुँह उठाकर मैंने खाला को कहा- “खाला अपनी कमीज उतार लें ना… ऐसे उलझन हो रही है मुझे..”
खाला ने कहा “नहीं बेटा, ऐसे कोई अचानक आ गया तो मसला बन जायेगा..”
मैंने कहा- “खाला कोई नहीं आता। अगर आ भी गया तो लाइट गई हुई है। अंधेरे में किसी को क्या पता चलेगा?”
खाला कुछ देर हिचकिचाई। लेकिन जब मैंने फोर्स किया तो खाला मान गई। खाल उठी, अपनी कमीज और वा उत्तार दिया। मैं सोच-सांच के पागल हो रहा था की खाला मेरे सामने कमीज उत्तार रही हैं। चाहे अंधेरा ही था लेकिन ये एहसास ही बड़ा जानलेवा था की खाला मेरे सामने ऊपर से नंगी हो गई हैं।
खाला सीधा लेट गई। मैं उठा और खाला के ऊपर चढ़ गया और खाला के दोनों मम्मे पकड़ लिए।
खाला हँसी और कहा- “सबर नहीं होता तुमसे तो?”
मैं मुश्कुराया और अपना मुँह खाला के मम्मों में घुसा दिया। खाला के भारी और मोटे मम्में इस बात मेरे हाथों में थे। लण्ड को मैने खाला की जांघों में फंसा लिया। जैसे ही लण्ड जांघों में डाला।
खाला ने मेरा लण्ड पकड़कर बाहर निकाला और कहा- “इसको कंट्रोल में रखो…” और हल्का सा लण्ड दबा दिया।
मेरे मुह से सिसकी निकल गईं।
खाला ने शरारत से कहा- “क्या हुवा बेटा, क्या जोर से दब गया? अच्छा मैं सहला देती हैं ताकी ठीक हो जाये…” कहकर खाला में दोबारा लण्ड पकड़ा और मुट्ठी में दबाकर हल्का-हल्का सहलाने लगी।
मेरा जिस्म कांपने लगा, खाला के हाथ में लण्ड देकर। खाला बड़े प्रोफेशनल अंदाज में लण्ड को सहला रही थी।
और में उनके नंगे मम्मे दबा रहा था। फिर खाला में हाथ पीछे कर लिया लण्ड से।मैंने खाला के कान में कहा- “प्लीज… खाला और पकड़ें ना… बहुत मज़ा आ रहा है..”
खाला ने कहा “तुम बहुत मजे लेने लगे हो अभी… तुम्हारा इलाज करना पड़ेगा… अच्छा तुम अपनी सलवार नीचे करो तो मैं तुमको ज्यादा मजा दूं.”
में खुश हो गया। मैं उठा, सलवार नीचे की और खाला के साथ ही लेट गया। खाला ने मेरी तरफ करवट ले ली थी। अचानक मेरे लण्ड पे खाला का हाथ आ गया। और ये क्या? खाला का हाथ गीला-गीला लग रहा था जिसको वो पूरा लण्ड पे फेर रही थी।
मैंने खाला से पूछा “क्या लगाया हाथ पे?”
खाला ने कहा “थूक लगाया है ताकी तुम्हें तकलीफ ना हो सूखा हाथ लगाने से… फिर खाला ने अच्छी तरह लण्ड पे थूक मला और लण्ड की मूठ मारने लगी।
मैं मजे की इंतेहा में था इस वक्त। मैंने अपना हाथ उठाया और खाला के मोटे चूतड़ों पे रख दिया और दबाने लगा। खाला ने मुझे रोका नहीं। मैंने हाथ आगे किया तो मुझे खाला की गाण्ड की लकीर का एहसास हुवा। जैसे ही हाथ लकीर से टकराया।
खाला ने कहा “बेटा हाथ पीछे कर लो अपना। ये अच्छी बात नहीं है..”
मैंने हाथ पीछे कर लिया, और उनकी पूरी पिछाड़ी पे हाथ फेरने लगा। अचानक खाला लण्ड में तेज-तेज हाथ चलाने लगी। मजे से मेरा जिश्म झटके खाने लगा। खाला ने जोर से लण्ड को मसला तो मैं फारिग हो गया। मुझे लगा खाला भी फारिग हो गई थी, क्योंकी उनकी सांसों की रफ्तार बिगड़ी हुई थी। खाला ने लण्ड से हाथ उठा लिया था।
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मैंने सलवार पहनी और अपनी चारपाई पे आकर लेट गया। सुबह जब उठा तो जिश्म हल्का फुल्का हो रहा था। बाहर निकला तो देखा खाला नहाई हुई थी। मुझे देखकर मुश्कुराई। मैंने उनको आँख मारी और वाशरूम चला गया। नहा धोकर में भी फ्रेश हो गया था।
मैं जब लिखने बैठा तो बाजी की सहेली ज़ारा घर आई और बाजी के पास बैठकर उनसे गपशप करने लगी, और बीच-बीच में मुझ पे भी नजर डाल रही थी। मैं भी उसको देखकर मुश्कुराया। वो मुझे मीठी नजरों से देख रही थी।
फिर ज़ारा ने बाजी को कहा- “अली को भंजना मेरे साथ। इसने अम्मी के साथ जाना हैं एक काम है। शाम तक
आ जायेगा…
बाजी ने मामी से पूछकर मुझे जाने दिया। में उठा और ज़ारा के साथ बाहर निकल आया।
ज़ारा ने कहा- “रात को क्यों भाग आए? मैं बाद में आई तो तुम वहां पे नहीं थे..”
मैंने कहा- “मैं इर गया था, इसलिए निकल आया की कही तुम्हारी अम्मी को पता ना चल जाए?”
जारा ने कहा- “आज रात को आना जरूर…”
मैंने हामी भर ली।
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