ने हाथ ऊपर किए और खाला के मम्मे पकड़ लिए। उनका दबाया तो खाला ने मेरे हाथों पे चपत लगाई- “क्या कर रहे हो बेटा। जगह तो देख लिया करो की हम कहां खड़े हैं। हर जगह शुरू हो जाते हो.”
मैंने कहा- “खाला क्या करू? आपके बगैर रहा भी तो नहीं जाता…” और नीचे से लण्ड को खाला के चूतड़ों में घुसा दिया जो अब खड़ा हो रहा था।
खाला ने कहा “बेटा हाथ तो पीछे कर लो, कोई अचानक आ गया तो अच्छा नहीं लगेगा.”
मैंने हाथ नीचे कर लिए और खाला को गाल पे किम की, और कहा- “लो मेरी स्वीट खाला जान, कर लिए हाथ नीचं…” फिर मैंने पूछा- “नहाने लगी हो?”
खाला ने कहा “हो…”
मैंने शरारत से कहा- “अकेले ही नहाना है। मुझे भी साथ ही नहला दें…”
खाला हँसी और कहा “चल हट बेशर्म… अब तुम बड़े हो गये हो..”
मैंने अपना खड़ा लण्ड उनकी गाण्ड में दबाया और कहा- “में बड़ा हो गया था मैं बड़ा हो गया?”
खाला ने कहा “दानों ही बड़े हो गये हैं.”
में बड़ा खुश हुवा की खाला मुझसे ऐसी बात कर रही हैं। खुलकर नहीं तो चलो टके-छुपे लफ़्ज़ों में ही सही। मैंने अपने हाथ खाला के मोटें चतड़ा पे रखें और कहा- “खाला आपके भी तो ये एक्सट्रा बड़े हो गये हैं। इनको क्या खिलती हो आप?”
खाला ने कहा “इनको तुम्हारे खालू दाना डालते हैं…”
मैं बड़ा हैरान हुआ। खाला आज किसी और ही मूड में हैं, जो आराम से ऐसी बातें किए जा रही थी। मैंने उनके चूतड़ों को दबाकर कहा- “खाला मुझे ये बहुत पसन्द हैं.
खाला ने कहा “अच्छा तो इसीलिए अपनी पसन्द की चीज तुमने पकड़ी हुई है?” और हम दोनों मुश्कुराए।
मैंने कहा- “जी खाला, इसीलिए पकड़ी है… मैंने खाला के चूतड़ों को पकड़कर फैलया और लण्ड को लकीर में फैंसा दिया, जो सीधा गाण्ड के छेद पे जा लगा।
खाला ने अपने चूतड़ दबा लिए, और दो-तीन बार अपने चूतड़ों को नरम और टाइट किया मेरे लण्ड पे। जिससे मेरे लण्ड से जान निकलती हुई महसूस हुई।
खाला ने कहा “ध्यान रखना कोई आ ना जाए…”
मैंने कहा- “नहीं आता खाला, मेरा ध्यान दरवाजे में है…
खाला अब पूरी तरह मेरे लण्ड पे अपने भारी चूतड़ नरम और टाइट कर रही थी। मुझे लग रहा था खाला में कुछ देर और ऐसा किया तो मैं यही फारिग हो जाऊँगा। मैंने लण्ड बाहर निकाल लिया उनके चूतड़ों से, क्योंकी मैं अभी फारिग नहीं था होना चाहता था।
खाला ने कहा “क्या हुवा बेटा, मजा नहीं आया?”
मैंने कहा- “खाला मेरा होने लगा था, इसलिए निकाल लिया.”
खाला शरारती मुश्कान के साथ कहा- “होने देते..”
मैंने खाला की तरफ देखा तो खाला मुश्कुरा रही थी। बाहर से किसी के आने का एहसास हुआ तो में पीछे होकर खड़ा हो गया।
***** *****ये लुबना थी। उसने आकर कहा- “अम्मी आपको बाहर मामी बुला रही है…
खाला बाहर निकल गईं।
मजे लुबना को रुकने का इशारा किया। जैसे ही खाला बाहर निकली मैंने लुबना को पकड़ लिया और उसको किस करने लगा।
लुबना अपने आपमें मुझे छुड़वाने लगी, और कहा- “काई आ जायेगा..”
.
लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। मैंने अपना खड़ा लण्ड उसकी फुद्दी से जोड़ दिया, और उसके मम्मे पकड़ लिए। लुबना अब टोली पढ़ गई थी। में पहले ही बहुत गरम हो रहा था और दिल कर रहा था लण्ड किसी फुद्दी में डाल दूं। मेरा लण्ड बुरी तरह अकड़ा हुवा था।
मैंने लुबना को कहा- “जान, बड़ा दिल कर रहा है तुम्हारी फुद्दी मारने को..”
लुबना ने कहा- “नहीं यहां नहीं। जब अपने घर जायेंगे फिर ले लेना.”
मन लुबना को दरवाजे के साथ दीवार के साथ लगाया हुआ था, और लण्ड से उसकी फुद्दी पे घस्से मार रहा था।
लुबना ने कहा- “अब बस भी करो, मुझे जाने दो… लुबना ने जोर लगाकर मुझसे छुड़वाया और बाहर भाग गई।
मैं कुछ देर अंदर रुका ताकी लण्ड बैठ जाये। जब बैठ गया तो मैं भी रूम से बाहर निकल आया। जहां बाजी मुन्नो को पढ़ा रही थी। दो दिन से मैंने काम नहीं लिखा था।
बाजी ने कहा- “अली किताबें ले आओ और काम लिखो बैंठकर…”
मैंने बैग लिया अंदर से और किताबें लेकर बैठ गया। बाजी पास बैठी हुई थी। मैंने काम लिखते हो बाजी को कहा- “आज बड़ा दिल कर रहा है फुद्दी मारने के लिये प्लीज … कुछ करा…”)
बाजी ने पहले तो नखरा दिखया फिर कहा- “अच्छा… मैं कुछ करती हैं…” फिर जब पढ़ लिख के फारिग हमें तो
आसमान में बादल बन गये। बारिश का मौसम हो गया।
मामी ने बाजी से कहा- “ऊपर से जाकर कपड़े उतार लो, सूखने को डाले हमें थे…”
बाजी ऊपर चली गई और मुझे भी ऊपर आने का इशारा कर दिया। मैं सबसे नजर बचाकर ऊपर चला गया। मैं और बाजी ऊपर रूम में चले गये, और खिड़की के पास खड़े हो गये, जिससे बाहर की नजर रख सकें। मैं और बाजी ने झप्पी लगाई और किस करने लगे। किस करते हये बाजी ने मेरी सलवार नीचे की और अपनी भी। फिर मेरे लण्ड को फुद्दी पे अडजस्ट किया और लण्ड दबा लिया। मैंने बाजी के मम्मे पकड़ लिए और दबाने लगा। बाजी जीचे में लण्ड पे अपनी फुददी रगड़ रही थी।
फिर बाजी में मुझे छोड़ा और दीवार के साथ अपनी गाण्ड निकालकर घोड़ी बन गई। मैं बाजी के पीछे गया लण्ड पे थूक मला और फुद्दी की सीध में लण्ड रखकर लण्ड को फुद्दी में उतार दिया। साथ ही बाजी की एक सेक्सी आह्ह … निकली मुँह से। मेरा मजे से बुरा हाल था और मैं चाह रहा था ऐसे ही लण्ड डालें खड़ा रह बाजी की फुद्दी में।
लेकिन बाजी ने कहा- “अली जल्दी-जल्दी करो, कोई ऊपर ना आ जाये।
ये सुनते ही मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और अपने हाथ बाजी की बाहर को निकली हुई गाण्ड पे रख दिए और नरम गाण्ड को दबाकर डबल मजा ले रहा था। कुछ देर बाद में और बाजी इकट्ठे फारिग हमें। मैं नीचे चला गया और ऐसे शो किया की मैं बाहर से आ रहा हैं। दोपहर का खाना खाकर मैं सो गया।
बर्दाश्त नहीं होता अब – holi sex story