kambikuttan agar pehla part nahi padha hai to Incest खाला जमीला – Part 1 – kambikuttan yaha padhiye dosto..
ab aage…
वहीं मैंने लण्ड साफ किया और एक-एक करके वाशरूम से बाहर आ गये। फिर नीचे भी ऐसे गये जिससे घर वालों को शक ना हो। नीचे थोड़ी देर गप-शप हुई, और साने को लेट गये। में नीचे खाला के पास ही लेटा था। में जल्द सो गया था। रात को मेरी आँख खुली क्योंकी प्यास लग रही थी।
मैं उठा और पानी पीने किचन में गया। वापस आया तो खाला कर बट लिए सो रही थी। मैं दुबारा लेटा और सो गया। अगले दिन सारा दिन बस ऐसे ही छेड़छाड़ करते गुज़रा। जैसे है रात हई मुझे बाजी के घर जाने की जल्दी पड़ गई। मैंने खाना खाया और टहलने के बहाने बाहर निकाल आया, और मेरे कदम बाजी की दोस्त के घर की तरफ उठ गये।
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बाजी की दोस्त के घर के बाहर पहुँचा तो देखा वो लड़की बैठक के दरवाजे में खड़ी थी। मैं इधर-उधर देखता अंदर चला गया बैठक के बाहर वाले रास्ते से। अंदर अधेरा था बैठक में। बस सहन की रोशनी से बैठक में हल्का सा उजाला था। मैं आ तो गया था, लेकिन दिल धड़क रहा था। अंदर से डर भी लग रहा था।
बाजी की दोस्त मेरे पास आई और अपना नाम उसने ज़ारा बताया। ज़ारा एक भरे हुये जिस्म की लड़की थी उम 20 साल से ऊपर थी। थी बड़ी सेक्सी, हाइट थोड़ी कम थी इसकी बाजी अमीना से।
मैंने कहा- “जी बतायें क्या कहना था अपने?” मैंने डरते-डरते सवाल किया।
जारा ने कहा- “मैं तुमसे दोस्ती करना चाहती हैं। क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगे?”
ये सुनकर मैं बहुत खुश हुआ की एक लड़की मुझसे खुद दोस्ती करना चाहती है। मैंने कहा- “जी ठीक है, मैं तैयार हूँ आपसे दोस्ती के लिये..”
जारा ने कहा- “ठीक है… अब हम अच्छे दोस्त हैं, और मुझे आप आप ना कहो, तुम कहो.”
मैं मुश्कुराया और कहा- “ठीक है जैसे तुम खुश..”
फिर ज़ारा मेरे करीब हुई।
मैंने उससे पूछा- “अम्मी अब्बू किधर हैं?”
उसने कहा- “भाई तो एक काम से शहर से बाहर गया है और अम्मी अब्बू इधर गाँव में है। एक घर फोतगी की ताजियत करने गये हैं…”
अब हम दोनों करीब खड़े थे। मैंने कहा- “ये रिस्क है, कोई आ ना जाए?”
जारा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे तसल्ली दी. “कोई नहीं आता.” और मेरे हाथ को वो अपने दोनों हाथों में लेकर मसलने लगी थी।
मैं चुप रहा और अपना हाथ नहीं छुड़वाया। क्याकी मुझे मजा आ रहा था उसके नरम हाथों को महसूस करके। तन्हाई में एक लड़की के साथ खड़ा था और अब मेरे लण्ड में सरसराहट हो रही थी। में समझ गया अब लण्ड खड़ा हो जायेगा।
जारा ने इस वक्त दुपट्टा नहीं लिया हुवा था। उसके मम्मे काफी टाइट थे। उसने शार्ट कमीज पहनी हुई थी और जीचे चूड़ीदार पाजामा। कुल मिलाकर ज़ारा एक सेक्स मशीन लग रही थी।
कुछ देर बाद मैंने कहा- “मैं अब चलता है काफी टाइम हो गया है…”
जारा ने कहा- “नहीं, अभी टाइम है अम्मी अब्बू के आने में…” इसके साथ ही ज़ारा मरे और करीब आ गई और मुझसे उसका जिस्म टच हुवा तो मुझे उसकी गरम साँसें अपने ऊपर महसूस हुई और धीरे से उसने मुझसे कहा “आओ इधर सोफे पे बैठते हैं..”
जारा ने कहा- “नहीं, अभी टाइम है अम्मी अब्बू के आने में…” इसके साथ ही ज़ारा मरे और करीब आ गई और मुझसे उसका जिस्म टच हुवा तो मुझे उसकी गरम साँसें अपने ऊपर महसूस हुई और धीरे से उसने मुझसे कहा “आओ इधर सोफे पे बैठते हैं..”
जब ज़ारा सोफे पे बैठी तो मुझसे सटकर बैठ गई और अपना चेहरा मेरी तरफ करके बैठी और अपना एक हाथ मेरी जांघ पे रख दिया। उसका हाथ मेरी जांघ पे रंगने लगा था। मेरा दिल उछल के गले में आ गया। लण्ड जो पहले ही खड़ा था उसने झटका लिया, जिसको जारा ने भी महसूस किया। इस वक़्त हम दोनों चुप थे और खामोश जबान समझ रहे थे एक दूसरे की।
अचानक जारा ने हाथ बढ़ाकर मेरा लण्ड पकड़ लिया। जैसे ही मेरा लण्ड उसके हाथ में जकड़ा गया, साथ ही जारा की आवाज निकली- “ओहहह… इतना लंबा वाउ… इस उम्र में 5 इंच का लण्ड बड़ी बात थी उसके लिये। फिर ज़ारा ने कहा- “अली तुमनें तो पूरा नाग पाल रखा है…”
मैं मुश्कुरा के रह ग्या। अब ज़ारा का हाथ लण्ड पे चल रहा था। मैंने अपना एक हाथ ज़ारा की मोटी जांघ पे रख दिया। रेशमी सूट के ऊपर से उसका जिश्म ऐसे ही था जैसे नंगे जिस्म का हाथ लगा रहा है। मेरी झिझक खतम हो गई थी। मैं ज़ारा की नरम जांघ को दबा रहा था अब, और मजे से लण्ड दबवा रहा था। ज़ारा ने अपना हाथ मेरी सलबार में डाल दिया और लण्ड को पकड़ लिया। लण्ड की टोपी पें एक खास अंदाज में अपने हाथ के अंगूठे का दबाया जिससे मेरा लण्ड जोश से सनसना उठा।
मेरे लण्ड में एक्सट्रा एनर्जी आ गई ऐसा करने से। मेरी आँखें बंद हो गईं। ज़ारा में मेरी सलवार पकड़कर नीचे खिसकाई। अब मेरा लण्ड नंगा हो गया था। ज़ारा ने लण्ड को मुँह में लिया और जबरदस्त चुप्पा लगाया और टोपी की नोक पे जुबान की नोक फेर रही थी साथ में। मुझे हैरानगी नहीं हुई। क्योंकी बाजी की सहेली थी तो ऐसा ही होना था।
जारा लण्ड को मुंह में गोल-गोल घुमा रही थी। अचानक वो उठी उसने अपनी सलवार उतार दी और मेरे ऊपर आकर बैठ गई टाँगें बायें दायां रखकर, और मुह मेरी तरफ कर लिया। उफफ्फ… जब वो बैठी तो उसकी गरम फुद्दी मेरे लण्ड से टच हुई। मेरा गरम लण्ड उसकी गीली फुद्दी की नीचे दब गया था। उसने मुझे किस की
और मैं भी उसका जवाब देने लगा।
जारा धीरे-धीरे हिलने लगी, जिससे उसकी फुद्दी मेरे लण्ड पें घिसने लगी थी। मेरा मजं से बुरा हाल हो गया था। मैंने अपने हाथ बढ़ाए और उसके चूतड़ बगल से पकड़कर मसलने लगा। चूतड़ों पे गास्त बहुत नरम था उसका। दिल कर रहा था यहां से जारा के चूतड़ पकड़े रखें बंदा।
किस करते हमें ज़ारा हिल रही थी। उसकी फुददी से पानी निकलकर मेरे लण्ड पे बह रहा था। मैं समझ गया
ज़ारा फारिग हो रही है, लेकिन उसकी हवस कम नहीं हुई थी। इसलिए अभी भी लण्ड में बैठी फुद्दी को मसले जा रही थी लण्ड पें।
मेरे लण्ड का इस वक़्त बुरा हाल हो रहा था। मुझे लग रहा था अब मेरा भी निकलने वाला है। मैंने ज़ारा के चूतड़ों को जोर से पकड़ लिया और घस्से लगाने लगा उसकी फुद्दी पें। ज़ारा की सिसकियां निकाल रही थी। कुछ देर बाद में फारिग हो गया।
जारा मुझपर से उठी सलवार पहनी, और मैंने भी अपने कपड़े ठीक किए। ज़ारा को लंबी किस की और बाहर निकल आया बैंठक के रास्ते। कल गत दुबारा आने का टाइम हमने फिक्स कर लिया था।
में घर पहुँचा तो खाला ने कहा- “इतनी देर कहां लगा दी?”मैंने कहा- “बस घुमता रहा, टाइम का पता नहीं चला…”
खैर, कुछ देर गपशप करके सोने के लिये लेट गया। फिर ऐसा कुछ खास नहीं हुआ। मैं सो गया और सुबह अपने टाइम में उठा। नहा धोकर नाश्ता किया और टीवी लगाकर बैठ गया।
हमको एक हफ़्ता हो गया था यहां आए, और में अब तक दो फुदिया मार चुका था माँ बेटी की। दोनों ही सेक्स
के मममले में खिलाड़ी निकली थी। मेरा इस वक़्त बड़ा दिल कर रहा था खाला से मस्ती करने का। सुबह का टाइम था हर कोई किसी ना किसी काम में बिजी था। खाला किचेन में थी। मैं उनकी तरफ ही देख रहा था की कोई मोका बने और मैं खाला को झप्पी लगाऊँ।
अचानक खाला किचेन से निकली और नानी के कमरे में अपने चूतड़ मटकाती चली गई। मेरी नजर चूंकी उन में पहले से थी इसलिए उनके भारी चूतड़ हिलते हुये मुझे दिख गये।

मैं भी मोका देखकर उठा और खाला के पीछे चला गया। खाला रूम में अपना सूट निकालकर प्रेस कर रही थी खड़ी होकर। मैं गया और खाला को पीछे से झप्पी लगा लो, और कहा- “खाला आई मिस यू…
खाला मुश्कुराई और कहा- “खैर तो है? आज सुबह ही मेरी याद आ गई। रात को तो तुम जल्दी सो गये थे। मुझे लगा था शायद तुम झप्पी लगाने आओ मेरी चारपाई पे…”
मैंने खाला को अपने साथ दबातें हमें कहा “बस खाला पता ही नहीं चला कब नींद आ गई.” अब उनको क्या बताता रात को की आपका भांजा फुद्दी पे लण्ड रगड़ के आया था।
मैंने हाथ ऊपर किए और खाला के मम्मे पकड़ लिए। उनका दबाया तो खाला ने मेरे हाथों पे चपत लगाई- “क्या कर रहे हो बेटा। जगह तो देख लिया करो की हम कहां खड़े हैं। हर जगह शुरू हो जाते हो.”
मैंने कहा- “खाला क्या करू? आपके बगैर रहा भी तो नहीं जाता…” और नीचे से लण्ड को खाला के चूतड़ों में घुसा दिया जो अब खड़ा हो रहा था।
खाला ने कहा “बेटा हाथ तो पीछे कर लो, कोई अचानक आ गया तो अच्छा नहीं लगेगा.”
kambikuttan – फुद्दि सिर्फ़ लंड मांगती है – Indian incest sex story