प्रशांत: “जीजाजी हम लोग अभी चेकआउट नहीं करेंगे, एक घन्टे बाद करेंगे। मुझे ऑफिस की एक इम्पोर्टेन्ट मीटिंग अटेंड करने के लिए कॉल करना हैं”
मैने एक नजर जीजाजी को देखा और दूसरी नजर निरु को। निरु शरमाते हुए स्माइल कर रही थी।
जीजजी: “घुमने आये हो तब तो ऑफिस का काम छोड़ दो प्रशांत। मना कर दो ऑफिस वालों को”
नीरु: “जीजाजी कोई जरुरी मीटिंग हैं प्रशांत की तो उसको अटेंड करने दो… एक घन्टे में काम ख़त्म हो जायेगा न प्रशांत या और ज्यादा टाइम लगेगा?”
नीरु अब और भी शरारती मूड में आ चुकी थी। मुझे लग रहा था की उसकी भी चुदाई की बहुत इच्छा हो रही होगी। वो मुझे प्यासी निगाहों से देख रही थी। मेरे इस झूठ पर निरु अब मंद मंद मुस्कुरा कर शर्मा भी रही थी। मगर निरु को क्या पता था की उसकी प्यास मैं नहीं उसके जीजाजी बुझाने वाले है। और वो प्यास पूरी बुझने से पहले ही मैं उनको रंगे हाथों पकड़ने वाला हूँ। मैने जीजाजी को ख़ास तौर से जोर देकर सुनाते हुए बताया।
प्रशांत: “हॉ, एक घंटा ही लगेगा और मैं बाहर गार्डन में जाकर कॉल अटेंड करुँगा, रूम में नेटवर्क अच्छा नहीं आता। निरु तुम चल रही हो, तुम्हे रूम तक छोड़ दूंगा?”
नीरु: “हॉ, चलो”
नीरज जीजाजी: “अरे निरु, तुम कहाँ जा रही हो? तुम रुको यहि, तुम अकेले रूम पर क्या करोगी? प्रशांत तो कॉल के लिए बाहर जाएगा”
नीरु: “मुझे अपना बैग भी पैक करना बाकी है। पैर दर्द से रात को देर से नींद आई थी तो मैं प्रशांत के आने तक थोड़ा सो लुंगी”
ऋतू दीदी: “जाने दो उसे रेस्ट करने दो। चलो हम भी ब्रेकफास्ट स्टार्ट करते हैं”
मै अब निरु के साथ फिर अपने रूम में आ गया। प्लान का एक पार्ट हो चुका था और दूसरे पार्ट की बारी थी। रूम में आते ही निरु मुझसे चिपक गयी की मैंने क्या प्लान बनाया है। निरु को क्या पता मेरा असली प्लान क्या था ?
मैने निरु से उसके डुपट्टे, स्कार्फ, चुनरी जो भी थी वो मांगा। वो बहुत एक्साइटेड़ थी की मैं उसकी कौन सी स्पेशल चुदाई करने वाला था की उसको ज़िन्दगी भर याद रहेगी।
उसने सब लाकर दे दिया। मैने अब उसके एक एक कपडे खोल कर उसको नँगा करना शुरू कर दिया था। कपडे खुलने के बाद वो पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी थी और मुझे उसकी चुदाई की इच्छा थी पर मैंने अपने आप को रोका। मैने निरु को बेड पर डॉगी स्टाइल में बैठा दिया। निरु की तो वैसे ही यह फेवरेट चुदाई पोजीशन थी तो वो ख़ुशी ख़ुशी बैठ गयी।
मै उसकी आँखों पर स्कार्फ़ से पट्टी बांध दिया। निरु अब खिलखिलाते हुए हंस रही थी। इस तरह आँखों पर पट्टी बांध मैंने कभी उसकी चुदाई नहीं की थी। वो ख़ुशी से फुली नहीं समां रही थी। उसके बाद मैंने उसके दोनों हाथ बाँधे और बेड के हेडरेस्ट पर रख कर हाथ बाँध दिए। फिर उसके दोनों पैरो में एक एक चुनरी बांध कर बेड के लेग्स पर बाँध दिया।
नीरु के पाँव थोड़े चौड़े कर देख लिया की पीछे से दोनों पावो के बीच उसकी चूत की दरार दिखती रहे। चुनरी को थोड़ा और खींच टाइट किया ताकी पैर चौड़े ही रहे। नीरु को इस तरह देख मेरी खुद की कपडे खोल एक आखिरी बार उसकी चोदने की इच्छा हुयी। क्यों की इसके बाद वो रंगे हाथों पकड़ी जायेगी और मेरा उसके साथ रिश्ता भी टूट जाएगा।
पिछ्ली बार अपने फ़ोन से जीजाजी को कॉल किया था, इस बार वो गलती नहीं करनी थी। मैंने निरु का फ़ोन ले लिया और नीरज जीजा जी को मैसेज टाइप किया की “जीजाजी कम फस्ट, आई ऍम वेटिंग फॉर यू” इस बीच निरु लगातार मुझे आवाज दे बुला रही थी, क्यों की वो आँखों पर बंधी पट्टी से देख तो पा नहीं रही थी। फिर मैं निरु के पास गया।
प्रशांत: “बेबी, वो मैं कंडोम लाना भूल गया हूँ”
नीरु: “मैंने तुम्हे २ बार याद दिलाया था की कंडोम याद से रख लेना और तुमने कहा भी था की रख लिया। फिर कैसे छूट गया!”
प्रशांत: “वो लास्ट मिनट कपडे अन्दर बाहर कर रहा था तो बाहर ही छूट गया होगा। मैं अभी टैक्सी लेकर जाता हूँ और आधे घन्टे में मार्किट से लेकर आया”
नीरु: “तो फिर मुझे खोल दो, मैं तब तक ऐसे बैठे क्या करुँगी?”
प्रशांत: “मैं अभी खोलूँगा और वापिस आकर तुम्हे फिर बांधूंगा तो टाइम ख़राब होगा। तुम मूड ख़राब मत करो, तुम ऐसे ही रहना। तुम्हे तो वैसे भी इस पोज़ में रहने की आदत भी हैं”
नीरु: “मैं और कर भी क्या सकती हूँ! पूरा बाँध रखा है। हमारे पास फिर आधा घण्टा ही बचेगा चुदाई का, तुम जल्दी जाकर आओ”
मैने वो मोबाइल पर ड्राफ्ट किया मैसेज सेंड किया और सेंड होते ही वो मैसेज निरु के फ़ोन से डिलीट कर दिया और फ़ोन वहीं रख दिया। मैं अब दरवाजे से बाहर निकला और निकलते वक़्त एक बार फिर दरवाजा लॉक ना कर हल्का सा खुला रख दिया। मै अपने रूम के बाहर आया और छूप कर वेट करने लगा की जीजाजी अब आयेंगे। पर १० मिनट्स के बाद भी वो नहीं आए।
हालाँकि मैंने उनको जोर देकर कहा था की मैं रूम से बाहर गार्डन में जाकर कॉल लुँगा तो उनको आ जाना चाहिए था। शायद उन्होंने मैसेज नहीं पढ़ा होगा। मैं फिर सीधा पैंट्री की तरफ गया। कान में ईरफ़ोन लगाए मैं कॉल में होने का नाटक कर रहा था। वहाँ सिर्फ ऋतू दीदी थी।जीजजी वहाँ से निकल चुके थे, मगर मेरे रूम तक तो पहुचे ही नहीं। मैंने उनको गार्डन का बोला था, शायद वो मेरे गार्डन में आने का वेट कर रहे होंगे ताकी मेरे वहाँ आते ही वो निरु के रूम में जा सके। लगता हैं उन्होंने मेरा मैसेज नहीं पढ़ा होगा।
जीजजी को तो मैसेज भेजने की भी जरुरत नहीं थी। निरु कमरे में अकेली हैं, उनके लिए तो यह इशारा ही काफी था। ऋतू दीदी ने मुझे वहाँ पैंट्री में देख लिया था। मै वहाँ से निकल कर सीधा गार्डन में जाकर बैठ कर कॉल में होने का नाटक करता रहा। इधर उधर नजरे फेर देख रहा था की कहीं से जीजाजी मुझे देख रहे होंगे।
जीजजी शायद अब तक निरु तक पहुच गए होंगे और निरु को चोदना शुरू कर दिया होगा। मुझे उन्हें रंगे हाथों पकड़ना था। काफी टाइम हो गया था तो मैंने ईरफ़ोन निकाल फ़ोन जेब में रखा और अब वहाँ से उठ कर अपने रूम की तरफ जाने लगा तभी ऋतू दीदी गार्डन में आ गयी। ऋतू दीदी ने मुझे बैठे रहने का इशारा किया।
मुझे जल्दी से जाना था पर ऋतू दीदी का आर्डर मना नहीं कर सकता था। हम दोनों अब एक बेंच पर बैठ गए। ऋतू दीदी अब बहुत गम्भीर मुद्रा में मुझसे बात कर रही थी। उनके चेहरे पर एक चिन्ता थी।
प्रशांत: “जीजाजी कहाँ हैं?”
ऋतू दीदी: “चिंता मत करो, नीरज यहाँ नहीं आयेंगे। मुझे तुमसे जरुरी बात करनी हैं, फिर शायद टाइम ना मिले”
प्रशांत: “बोलिये दीदी”
ऋतू दीदी: “कल हम दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ, क्या तुमने निरु को बताया?”
प्रशांत: “नहीं। कैसे बताता!”
ऋतू दीदी: “तुम्हे मेरे साथ करके कैसा लगा?”
प्रशांत: “अच्छा था…अच्छा लगा दीदी”
ऋतू दीदी: “तुमने पहले भी कभी किसी के साथ किया हैं?”
प्रशांत: “नहीं, निरु के अलावा कल पहली बार आपके साथ ही…।”
ऋतू दीदी: “हमने बहुत बड़ी गलती कर दी है। हमें वो सब नहीं करना चाहिए था। मुझे निरु और नीरज के लिए बहुत बुरा लग रहा हैं”
प्रशांत: “हम आगे से ध्यान रखेंगे। मुझे अभी निरु के पास जाना है। एक जरुरी काम हैं”
ऋतू दीदी: “नहीं, तुम बैठो। निरु सो रही होगी, उसको सोने दो। मेरी बात ज्यादा जरुरी हैं”
मुझे जल्दी से जाकर निरु और जीजाजी को चुदते हुए रंगे हाथों पकड़ना था पर फिलहाल ऋतू दीदी से पीछा छुड़ाना था।
प्रशांत: “हां दीदि, जल्दी बोलिये”
ऋतू दीदी: “प्रशांत तुम बतओ, हमें क्या करना चाहिए? मुझे बहुत बुरा लग रहा हैं नीरज और निरु से चीटिंग करके। मैं उनसे नजरे नहीं मिला पा रही हूँ”
प्रशांत: “आप चिन्ता मत करो, उनको पता नहीं चलेगा”
ऋतू दीदी: “मैं नीरज और निरु को सब बताने का सोच रही हूँ और फिर माफ़ी मांग लुंगी”
प्रशांत: “नीरज जीजाजी ने भी कभी कुछ किया होगा, आपको उन्होंने कभी बताया क्या!”
ऋतू दीदी: “नीरज ऐसा कभी नहीं कर सकता”
प्रशांत: “आप प्लीज अभी मत बताना, कम से कम एक दिन और रुक जाये, घर पहुच कर देखते हैं”
ऋतू दीदी: “पक्का तुम निरु को धोखा तो नहीं दे रहे न?”
प्रशांत: “सच में दीदि, मैं इन सब चीजो से दूर हूँ। मैं आपकी कोई बात नहीं टालता वार्ना कल भी हमारे बीच नहीं होता। अभी मैं निरु के पास जाऊं?”
ऋतू दीदी: “ठीक हैं”
मै वहाँ से सर पर पैर रख कर भागा और अपने रूम के दरवाजे पर पहुंच। मुझे ४५ मिनट हो चुके थे। अगर जीजाजी का स्टैमिना अच्छा हुआ तो वो अभी तक निरु को चोद ही रहे होंगे।
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