प्रशांत: “वो तुम्हे चोट लगी थी तो मैंने सोचा जीजाजी को बुला कर तुम्हे हॉस्पिटल दिखा देते, इसलिए बुला लिया”
नीरु: “फ़ोन करने से पहले मुझसे एक बार पुछ तो लिया होता। मेरा पैर अब ठीक हैं, डॉक्टर की जरुरत नहीं हैं”
जीजजी: “कोई बात नहीं निरु, मुझे कोई तकलीफ नहीं हुयी। प्रशांत तुम्हारे लिए फिक्रमंद होगा। मैं अभी जाता हूँ, तुम लोग तैयार हो कर ब्रेकफास्ट के लिए पैंट्री में आ जाना”
जीजजी दरवाजा बंद कर चले गए। फिर मेरी बीवी शेरनी बन मुझ पर बरस पड़ी और चादर लपेटे बैठ गयी।
नीरु: “यह क्या हरकत थी? मैं यहाँ नंगी लेटी हुयी थी, फिर भी तुमने पहले तो जीजाजी को यहाँ बुलाया और ऊपर से दरवाजा भी खुला रख दिया!”
प्रशांत: “रात को तुम्हे इतना दर्द हो रहा था तो सोचा मैं डॉक्टर को बुला लु, इसलिए बाहर भी गया पर फिर सोचा जीजाजी की हेल्प ले लेता हूँ, तो उनको फ़ोन करते हुए अन्दर आया। दरवाजे को मैंने धक्का दिया था पर शायद वो पूरा बंद नहीं हुआ होगा। मैंने ध्यान नहीं दिया, सॉरी”
नीरु: “तुम्हारी इस लापरवाही के चक्कर में मैं कितनी शर्मिंदा होती यह सोचा तुमने? वो तो अच्छा हुआ की सुबह का टाइम था तो जीजाजी ने नॉक किया था और मैंने टाइम पर चादर ओढ़ लिया था, वार्ना क्या होता? वो तो भला हो की जीजाजी थे, कोई और अन्दर घुस आता तो क्या होता?”
प्रशांत: “सॉरी यार, तुम्हारा दर्द देखा नहीं गया रात को और इसी टेंशन में डोर खुला छोड़ने की यह गलती हो गयी”
नीरु: “मैं इस नंगी हालत में थी तो मुझे उठाना तो चाहिए था कपडे पहनने के लिए”
प्रशांत: “मुझे नहीं पता था की जीजाजी इतना जल्दी आ जाएंगे। मैंने सोचा वॉशरूम से आकर तुम्हे उठा दूंगा”
मैने रोनी सी सूरत बना ली और निरु पिघल गयी। वो मुझे देख स्माइल करने लगी और अपना चादर साइड में हटा कर अपनी बाहें फैला कर मुझे गले लगने को कहा।
नीरु: “तुम मेरे बारे में कितना सोचते हो, एक प्यारा सा हग करो”
नीरु को गले लगा उसके नंगे मम्मो से अपना सीना चिपकाये मुझे ठंडक मिली। मैंने शुक्र मनाया की मैं बच गया।
हमारा आज का प्रोग्राम यह था की हम ब्रेकफास्ट के बाद होटल से जल्दी चेकआउट करने के बाद अपने बैग्स होटल के लाकर में रख कर बाहर घूमने जाने वाले थे। दोपहर में घर वापसी के लिए हमें ट्रैन पकडनी थी।
मैन फिर नहाने के लिए वॉशरूम में गया। मैं यही सोच रहा था की मेरा प्लान कैसे फेल हो गया। जीजाजी बहुत शातिर खिलाडी है। जरुर उनको मेरे प्लान की भनक लग गयी होगी और उन्होंने मेरे प्लान को फेल कर दिया। जीजजी ऐसी पार्टी तो लगते नहीं की कमरे में नॉक करके आए। जरुर वो अन्दर घुस आये होंगे और निरु को इस रूप में देख टूट पड़े होंगे। मगर शायद निरु को भी मुझ पर शक़ हो गया होगा की यह एक ट्रैप हैं और दोनों ने मिलकर पूरा मामला ट्विस्ट कर दिया होगा।
जीजजी को इसी बात का शक़ हो गया होगा की अगर मैंने जीजाजी को फ़ोन कर यहाँ बुलाया था तो फिर मैं कहा गया ? जल्दबाजी में मेरा प्लान थोड़ा कच्चा बन गया था। मै अब एक नया फुलप्रूफ प्लान बनाने के बारे में सोचने लगा। नहाते वक़्त अलग अलग आइडियाज आ रहे थे और मुझे एक आईडिया मिल भी गया। मगर इसको पक्का बनाना था।
मै नहा कर बिना शर्ट पहने बाहर आया। निरु अभी भी टॉपलेस होकर नंगी लेटी हुयी थी। मेरे बाहर आते ही वो स्माइल करने लगी।
नीरु: “मेरा पैर अब ठीक हैं, अगर तुम्हे मेरे साथ कुछ करना हैं तो कर सकते हो, मगर एक क्विक वाला सेक्स, क्यों की तैयार होकर जाना भी हैं”
मै तो अपनी ही धुन में था और प्लान पर सोच रहा था तो सुन कर भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
नीरु: “तुम्हे हो क्या गया हैं? कल सुबह बहकी बहकी बातें कर रहे थे और आज सुबह इतनी बड़ी लापरवाही कर दि। तुम्हारी तबियत तो ठीक हैं?”
नीरु ने पास आकर मेरे सर पर हाथ रख मेरा टेम्प्रेचर चेक किया। फिर मेरे सीने से चिपक गयी। उसके नंगे मम्मे मेरे नंगे सीने से चिपक मुझे उत्तेजित करने लगे। मगर मेरे पास अभी प्यार करने का टाइम नहीं था, मुझे तो प्लान बनाना था।
प्रशांत: “जीजाजी और दीदी ब्रेकफास्ट के लिए वेट करेंगे, तुम तैयार हो जाओ”
नीरु: “तुमने आज तक कभी मुझे सेक्स के लिए मना नहीं बोला, आज क्या हुआ! नाराज हो मुझ पर की मैंने तुम्हे डाट दिया?”
प्रशांत: “अरे नहीं, तुम ठीक ही थी। मैंने ही लापरवाही कर दी थी”
नीरु: “अच्छा ठीक हैं वो सब भूल जाओ। मेरी बात सुनो। तुम तो परसो रात झड़ भी गए थे पर मेरा तो ४-५ दिन से पूरा हुआ ही नहीं है। मेरा कब करोगे?”प्रशांत: “अभी देर हो रही हैं पर पक्का वादा। अगले २४ घण्टो के अन्दर तुम्हारी ऐसी चुदाई होगी की तुम पूरी ज़िन्दगी याद रखोगी”
नीरु: “पक्का? ऐसा हैं तो मैं थोड़ा और वेट कर लुंगी”
नीरु अब नहाने चली गयी। मैं अब अपने प्लान को फुलप्रूफ बनाने में लग गया। मुझे निरु को जीजाजी से ऐसी चुदवाई करवानी थी की मैं उसे रंगे हाथों पकड़ो और उसको ज़िन्दगी भर वो चुदाई याद रहे। नीरु नहाने के बाद तैयार हो गायी।
मैंने पिछली वाली गलतियों से सबक ले इस बीच अपना प्लान को फुलप्रूफ कर लिया था। निरु ने जीन्स और शर्ट पहना था। निरु ब्रेकफास्ट के लिए जाने को तैयार थी।
प्रशांत: “निरु, मैं सोच रहा था की हम चेकआउट थोड़ा लेट करेंगे”
नीरु: “क्यों?”
प्रशांत: “ब्रेकफास्ट करने के बाद मेरा चुदाई का प्रोग्राम हैं”।
यह कह कर मैं स्माइल करने लगा। निरु भी एक दम खुश हो गयी। थोड़ी देर पहले वो ही खुद मुझे चोदने को उतारू थी।
नीरु: “सच्, मुझे पता नहीं था तुम्हारे २४ घंटो की मोहलत इतनी जल्दी आ जाएगी”
यह कह कर उसने मुझे फिर गले लगा लिया। उसके परफ्यूम की खुसबू से मैं मदहोष होने लगा। मगर अभी प्लान का टाइम था। मैंने उसको दूर किया।
प्रशांत: “मैं जीजाजी और ऋतू दीदी के सामने कोई काम का बहाना बना दूंगा और तुम मेरा साथ देना”
नीरु: “ओह्ह हो, नौटंकी, ठीक हैं, झूठ बोलकर सेक्स करने में बहुत मजा आयेगा, चलो”
हम लोग ब्रेकफास्ट के लिए पैंट्री में गए।
जीजाजी और ऋतू दीदी अभी वहाँ पहुचे नहीं थे और हम दोनों ने ब्रेकफास्ट शुरू किया। मुझे पता था की जीजाजी बैग पैक करके ही आयेंगे इसलिए थोड़ा लेट हो जाएंगे। मैने और निरु ने ब्रेकफास्ट ऑलमोस्ट ख़त्म कर लिया था क्यों की हमें इतना टाइम नहीं लगता जितना जीजाजी को लगता है।
उसके बाद जीजाजी और ऋतू दीदी वहाँ पहुचे। कल रात मैंने और ऋतू दीदी ने जो चुदाई का पाप किया था, मैं उनसे नजरे नहीं मिला रहा था। एक दो बार एक्सीडेंटली हमारी नजरे मिली और हम फिर शर्म के मारे दूसरी तरफ देखने लगतें।
वो भी जब आई तो उन्होंने मुझसे नजरे नहीं मिलायी थी। मुझसे ज्यादा बड़ा गुनाह तो उनका था, उन्होंने ही चुदाई की पहल की थी। वो ब्रेकफास्ट करना शुरू करते उसके पहले ही मैंने अपने प्लान की शुरुआत की। निरु अनजाने में ही सही मेरे प्लान में भागीदार बनी थी।
प्रशांत: “जीजाजी हम लोग अभी चेकआउट नहीं करेंगे, एक घन्टे बाद करेंगे। मुझे ऑफिस की एक इम्पोर्टेन्ट मीटिंग अटेंड करने के लिए कॉल करना हैं”
मैने एक नजर जीजाजी को देखा और दूसरी नजर निरु को। निरु शरमाते हुए स्माइल कर रही थी।
जीजजी: “घुमने आये हो तब तो ऑफिस का काम छोड़ दो प्रशांत। मना कर दो ऑफिस वालों को”
नीरु: “जीजाजी कोई जरुरी मीटिंग हैं प्रशांत की तो उसको अटेंड करने दो… एक घन्टे में काम ख़त्म हो जायेगा न प्रशांत या और ज्यादा टाइम लगेगा?”